दिन और रात की अवधियाँ

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चौघड़िया

दिन में आठ और रात में आठ अवधियाँ। ये आपके स्थान के वास्तविक सूर्योदय और सूर्यास्त से बाँटी जाती हैं, इसलिए ऋतु के साथ चलती हैं, घड़ी के साथ नहीं।

जगह और तारीख

स्थान
Bhātpāra
तारीख़
23 सितंबर 2026

सूर्योदय

5:25 AM

सूर्यास्त

5:32 PM

प्रत्येक दिन-अवधि

91 min

दिन

सूर्योदय से सूर्यास्त तक, आठ हिस्सों में

लाभअनुकूल5:25 AM6:56 AM
अमृतअनुकूल6:56 AM8:27 AM
कालटाला जाता है8:27 AM9:58 AM
शुभअनुकूल9:58 AM11:29 AM
रोगअभीटाला जाता है11:29 AM1:00 PM
उद्वेगटाला जाता है1:00 PM2:30 PM
चलसामान्य2:30 PM4:01 PM
लाभअनुकूल4:01 PM5:32 PM

रात

सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक, आठ हिस्सों में

उद्वेगटाला जाता है5:32 PM7:01 PM
शुभअनुकूल7:01 PM8:30 PM
अमृतअनुकूल8:30 PM10:00 PM
चलसामान्य10:00 PM11:29 PM
रोगटाला जाता है11:29 PM12:58 AM
कालटाला जाता है12:58 AM2:27 AM
लाभअनुकूल2:27 AM3:56 AM
उद्वेगटाला जाता है3:56 AM5:26 AM

इस दिन का पूरा पंचांग देखें

यही तारीख़, यही जगह — तिथि, नक्षत्र, राहु काल और बाक़ी पूरा पंचांग।

पंचांग

अवधियाँ 90 मिनट की क्यों नहीं होतीं?

दिन और रात, दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है, पर अलग-अलग। विषुव से दूर हटते ही दोनों अवधियाँ अलग लंबाई की हो जाती हैं। इसलिए एक ही तारीख़ का दिन चौघड़िया और रात चौघड़िया शायद ही कभी बराबर होते हैं। घड़ी के बजाय सूर्योदय से बाँटना ही इस पद्धति का पूरा सार है। और इसीलिए शहर बदलते ही उत्तर बदल जाता है।

शुभ, सम, त्याज्य

अमृत, शुभ और लाभ परंपरा में शुभ माने जाते हैं। चल सम है। उद्वेग, काल और रोग वे हैं जिनसे लोग बचकर समय तय करते हैं। ये नाम परंपरा से आए हैं और वार से तय होते हैं। ये आकाश देखकर नहीं पढ़े जाते। विभाजन स्वयं सटीक है। नामकरण विरासत में मिला है।

अन्य साधन