विंशोत्तरी समयरेखा
लाइवआपकी दशा समयरेखा।
120 साल का चक्र, नौ ग्रहों में बँटा हुआ। आप कौन सी दशा में हैं, यह इससे तय होता है कि जन्म के समय चंद्रमा अपने नक्षत्र में कहाँ थे।
अपनी जन्म-जानकारी भरिए
दशा परिभाषा से ही निरयन है, इसलिए लाहिड़ी अयनांश अपने आप लग जाता है।
120 वर्ष का चक्र
विंशोत्तरी एक जीवन को नौ ग्रह-कालों में बाँटती है, जो सदा इसी क्रम में चलते हैं और सदा इतने ही लंबे होते हैं। इनका योग ठीक 120 वर्ष होता है — पूर्ण आयु की कल्पना — और यहीं से इस पद्धति का नाम आया है।
| क्रम | महादशा स्वामी | अवधि | चक्र में हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ☋केतु | 7 years | 5.8% |
| 2 | ♀शुक्र | 20 years | 16.7% |
| 3 | ☉सूर्य | 6 years | 5.0% |
| 4 | ☽चंद्र | 10 years | 8.3% |
| 5 | ♂मंगल | 7 years | 5.8% |
| 6 | ☊राहु | 18 years | 15.0% |
| 7 | ♃गुरु | 16 years | 13.3% |
| 8 | ♄शनि | 19 years | 15.8% |
| 9 | ☿बुध | 17 years | 14.2% |
आपकी समयरेखा कहाँ से शुरू होती है
पहला चरण
चंद्रमा का नक्षत्र खोजिए
राशिचक्र 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटता है। आपके जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, वही तय करता है कि नौ स्वामियों में से कौन आपका क्रम शुरू करेगा। 27 नक्षत्र इन नौ स्वामियों में तीन बार घूम जाते हैं।
दूसरा चरण
देखिए वह कितना आगे बढ़ चुका था
आपका जन्म किसी काल के आरंभ में नहीं होता। चंद्रमा अपने नक्षत्र का कुछ हिस्सा पहले ही पार कर चुका होता है। उतनी ही पहली महादशा भी बीत चुकी होती है, और जो बचा वही जन्म के समय आपका शेष है।
तीसरा चरण
बाँटिए, और फिर बाँटिए
हर महादशा उन्हीं नौ स्वामियों में उन्हीं अनुपातों में बँटती है, जिससे अंतर्दशाएँ बनती हैं; और उनमें से हर एक फिर प्रत्यंतर्दशाओं में बँटती है। हम तीनों स्तर निकालते हैं।
यहाँ सही जन्म समय क्यों ज़रूरी है
चंद्रमा दिन में लगभग 13° चलता है। इसलिए एक घंटे की चूक से वह नक्षत्र में कितना आगे बढ़ा, यह बदल जाता है, और दशा की सीमाएँ महीनों खिसक जाती हैं। अनुमानित समय पर बनी समयरेखा सटीक दिखती है, होती नहीं।
दशा क्या नहीं है
दशा का स्वामी कोई फ़ैसला नहीं है। शनि के उन्नीस वर्ष उन्नीस बुरे वर्ष नहीं हैं। गुरु के सोलह किसी बात की गारंटी नहीं हैं। परंपरा हर काल को उसी कुंडली के सामने पढ़ती है जिसमें वह चल रहा है। इसीलिए एक ही शनि महादशा में चल रहे दो लोगों को एक ही बात नहीं कही जाती। हम आपको सीमाएँ देते हैं, दिन तक की गणना के साथ। उनका अर्थ एक फलादेश है, और हम फलादेश नहीं बेचते।
आगे पढ़ना चाहें तो
केवल पुस्तकें, क्योंकि यहाँ से कमाने के लिए हम बस यही स्वीकार करते हैं। हम रत्न, यंत्र या पूजा के लिंक नहीं देते। वे उसी डर के सहारे बेचे जाते हैं जो इस जैसा पृष्ठ पैदा कर सकता है, और ऐसा न करना एक वादा है जो किया गया है परिचय पृष्ठ पर.
- Light on Life: An Introduction to the Astrology of IndiaHart de Fouw and Robert Svobodaअंग्रेज़ी में गंभीरता से पढ़ने वालों को सबसे पहले यही सुझाई जाती है। यह इस बात में सावधान है कि परंपरा क्या कहती है और क्या नहीं।
- Hindu Predictive AstrologyB. V. Ramanगोचर और शास्त्रीय नियमों की मानक पुस्तक। हमने अपनी गोचर तालिकाएँ इसी के गोचरफल अध्याय से मिलाकर जाँची हैं।
- Brihat Parashara Hora Shastratranslated by R. Santhanamवह मूल ग्रंथ जिससे वैदिक ज्योतिष का लगभग सब कुछ निकला है। पढ़ने में कठिन, पर अगर किसी नियम को मूल में जाँचना हो तो रखने लायक़।
अन्य साधन