दैनिक पंचांग · सूर्योदय से सूर्योदय तक
ब्रुकलिन का पंचांग
पाँचों अंग, सूर्य-चंद्र, और हर वह समय जो देखकर काम तय किया जाता है — इसी जगह के लिए गणना किए गए, किसी राष्ट्रीय पंचांग से छापे हुए नहीं।
शुक्ल पक्ष, नवमी · पूर्व आषाढ़ा
शक 1948 का भाद्रपद मास। सूर्योदय 06:41, सूर्यास्त 18:56। तिथि 08:22 पर दशमी में बदल जाती है।
राहु काल 17:24 – 18:56 — डेढ़ घंटा, जिसे छोड़ देना बेहतर है
आज रात का चंद्रमा
बढ़ता हुआ, 65% प्रकाशित
01:44, 21 सित॰ तक धनु राशि में
01 · दिन, घंटे दर घंटे
पूरा दिन, शुरू से आख़िर तक
सूर्य इस समय कहाँ है, और दिन के कौन से हिस्से देखकर काम तय करना है
दिन के आठ हिस्से
सूर्योदय से सूर्यास्त तक 12 घं 15 मि का समय है, और परंपरा इसे 1 घं 32 मि के आठ बराबर हिस्सों में बाँटती है। इनमें से तीन ऐसे हैं जिन्हें छोड़ देना चाहिए — कौन से तीन, यह वार पर निर्भर करता है।
दिन का 10 घं 1 मि बाकी
- 106:41 – 08:13उद्वेगसाफ़ — सूर्योदय के बाद का पहला खुला हिस्सा।अनुकूल
- 208:13 – 09:45चलसाफ़ — परंपरा में इस हिस्से पर कोई आपत्ति नहीं है।अभी
- 309:45 – 11:17लाभसाफ़ — खुला है, और आज बचा हुआ काम लायक समय यही है।अनुकूल
- 411:17 – 12:49अमृतसाफ़ — इसी में अभिजित मुहूर्त है, 12:24 – 13:13, दिन का सबसे अच्छा समय।अनुकूल
- 512:49 – 14:21कालयमगंड — शुरुआत और यात्रा के लिए टाला जाता है।टालिए
- 614:21 – 15:53शुभसाफ़ — यमगंड बीत गया, फिर से खुला है।अनुकूल
- 715:53 – 17:24रोगगुलिक — जो काम टिकना चाहिए, उसके लिए टाला जाता है।टालिए
- 817:24 – 18:56उद्वेगराहु काल — तीनों में सबसे भारी — कोई नया काम शुरू नहीं।टालिए
02 · दिन के आठ भाग
चौघड़िया
दिन को आठ और रात को आठ हिस्सों में बाँटा जाता है, अलग-अलग। दोनों की लंबाई शायद ही कभी बराबर होती है। इसलिए एक ही तारीख़ का दिन-हिस्सा और रात-हिस्सा आम तौर पर अलग होते हैं — यहाँ 1 घं 32 मि और 1 घं 28 मि।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक
- 106:41 – 08:13उद्वेग — बेचैनी का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 208:13 – 09:45चल — चलने-फिरने का समय, सामान्य गिना जाता है।अभी
- 309:45 – 11:17लाभ — लाभ का समय, अनुकूल गिना जाता है।अनुकूल
- 411:17 – 12:49अमृत — अमृत का समय, आठों में सबसे अच्छा।अनुकूल
- 512:49 – 14:21काल — समय का दबाव माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 614:21 – 15:53शुभ — नाम का अर्थ ही शुभ है, और तालिका इसे वैसे ही गिनती है।अनुकूल
- 715:53 – 17:24रोग — रोग का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 817:24 – 18:56उद्वेग — बेचैनी का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक
- 118:56 – 20:24शुभ — नाम का अर्थ ही शुभ है, और तालिका इसे वैसे ही गिनती है।अनुकूल
- 220:24 – 21:53अमृत — अमृत का समय, आठों में सबसे अच्छा।अनुकूल
- 321:53 – 23:21चल — चलने-फिरने का समय, सामान्य गिना जाता है।सामान्य
- 423:21 – 00:49, 21 सित॰रोग — रोग का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 500:49 – 02:18, 21 सित॰काल — समय का दबाव माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 602:18 – 03:46, 21 सित॰लाभ — लाभ का समय, अनुकूल गिना जाता है।अनुकूल
- 703:46 – 05:14, 21 सित॰उद्वेग — बेचैनी का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 805:14 – 06:42, 21 सित॰शुभ — नाम का अर्थ ही शुभ है, और तालिका इसे वैसे ही गिनती है।अनुकूल
03 · उदय और अस्त
सूर्य और चंद्र
सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
18:56
चंद्रोदय
16:00
चंद्रास्त
01:09
दिनमान
12 घं 15 मि
रात्रिमान
11 घं 46 मि
04 · तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार
पंचांग के पाँच अंग
पंचांग यानी पाँच अंग। हर अंग आकाश का एक हिस्सा है जो एक गिने हुए क्षण पर खत्म होता है। पट्टी बताती है कि अभी वाला कितना बीत चुका है।
तिथि
30 में से 9
शुक्ल पक्ष · नवमी
तक 08:22
- चल रहानवमी05:57, 19 सित॰ → 08:22
- अगलादशमी08:22 → 10:31, 21 सित॰
सूर्य और चंद्र के बीच 12° का अंतर। यही चंद्र दिवस है।
नक्षत्र
27 में से 20 · पद 3
पूर्व आषाढ़ा
तक 19:04
- चल रहापूर्व आषाढ़ा16:12, 19 सित॰ → 19:04
- अगलाउत्तर आषाढ़ा19:04 → 21:36, 21 सित॰
वह नक्षत्र जिससे चंद्रमा गुज़र रहा है — राशिचक्र का 13°20′ भाग।
योग
27 में से 5
शोभन
तक 06:34, 21 सित॰
- चल रहाशोभन05:51 → 06:34, 21 सित॰
- अगलाअतिगंड06:34, 21 सित॰ → 06:58, 22 सित॰
सूर्य और चंद्र के अंश जोड़कर, उसी प्रकार विभाजित किए गए।
करण
60 में से 18
कौलव
तक 08:22
- चल रहाकौलव19:11, 19 सित॰ → 08:22
- अगलातैतिल08:22 → 21:29
तिथि का आधा भाग। प्रत्येक तिथि में दो करण आते हैं।
वार
रविवार
रविवार
सूर्योदय से सूर्योदय तक
- चल रहारविवार06:41 → 06:41, 21 सित॰
- अगलासोमवार06:41, 21 सित॰ → 06:41, 22 सित॰
वार, जो मध्यरात्रि से नहीं बल्कि सूर्योदय से गिना जाता है।
चंद्र
धनु
तक 01:44, 21 सित॰ · फिर मकर
चंद्रमा एक राशि लगभग सवा दो दिन में पार करता है। वैदिक ज्योतिष इसी राशि को आपकी मुख्य राशि मानता है।
सूर्य
कन्या (Virgo)
तक 10:13, 17 अक्टू॰ · फिर तुला
सूर्य महीने में एक बार राशि बदलता है, जिसे संक्रांति कहते हैं। इसी संक्रांति से चंद्रमास का नाम तय होता है।
05 · हिंदू पंचांग की तारीख
वैदिक तिथि
चंद्रमास
भाद्रपद
अमांत · अमावस्या से अमावस्या तक
पक्ष
शुक्ल पक्ष
शुक्ल पक्ष
ऋतु
शरद
शरद
अयन
दक्षिणायन
सूर्य दक्षिण की ओर
विक्रम संवत
2083
उत्तर भारतीय गणना
शक संवत
1948
राष्ट्रीय संवत
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
तिथि, नक्षत्र और योग केवल समय पर निर्भर हैं, इसलिए इनके समाप्ति समय पूरे विश्व में समान रहते हैं। सूर्योदय से जुड़ी हर गणना ऐसी नहीं है। वैदिक दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय अक्षांश-देशांतर पर निर्भर करता है। दो शहरों में एक ही घड़ी के समय अलग-अलग तिथि हो सकती है, और उनका राहु काल एक घंटे से अधिक भिन्न होगा। स्थान के बिना पंचांग वास्तव में पंचांग नहीं है।
किसी पंचांग से छापा हुआ नहीं
इस पेज का हर आँकड़ा इसी तारीख और इन्हीं निर्देशांकों के लिए खगोलीय गणना से निकाला गया है, और फिर JPL Horizons से मिलाकर देखा गया है। छपा हुआ पंचांग पूरे इलाके के लिए मिनट तक गोल कर देता है। यह एक बिंदु के लिए सेकंड तक निकलता है। इसलिए कागज़ी पंचांग से थोड़ा फ़र्क होना स्वाभाविक है, और जाँच आप हमारी कर सकते हैं।
यही दिन अपनी कुंडली के हिसाब से देखना है?
आपका जन्म क्षण आज के गोचर को आपके लिए ख़ास बना देता है। मुफ़्त, बिना खाता बनाए, कुछ भी सहेजे बिना।