दैनिक पंचांग · सूर्योदय से सूर्योदय तक

कैलगरी का पंचांग

पाँचों अंग, सूर्य-चंद्र, और हर वह समय जो देखकर काम तय किया जाता है — इसी जगह के लिए गणना किए गए, किसी राष्ट्रीय पंचांग से छापे हुए नहीं।

जगह और तारीख

स्थान
कैलगरी
तिथि
4 नवंबर 2026

बुधवार, 4 नवंबर 2026 · कैलगरी, Alberta

कृष्ण पक्ष, एकादशी · पूर्व फाल्गुनी

शक 1948 का आश्विन मास। सूर्योदय 8:34 AM, सूर्यास्त 6:05 PM। तिथि 11:06 PM पर द्वादशी में बदल जाती है।

राहु काल 1:20 PM – 2:31 PM — डेढ़ घंटा, जिसे छोड़ देना बेहतर है

अभिजित:1:01 PM – 1:39 PM
ब्रह्म:6:39 AM – 7:36 AM
यमगंड:9:46 AM – 10:57 AM

आज रात का चंद्रमा

घटता हुआ, 22% प्रकाशित

आश्विन वद एकादशी

10:04 PM तक सिंह राशि में

01 · दिन, घंटे दर घंटे

पूरा दिन, शुरू से आख़िर तक

सूर्य इस समय कहाँ है, और दिन के कौन से हिस्से देखकर काम तय करना है

दिन के आठ हिस्से

सूर्योदय से सूर्यास्त तक 9 घं 31 मि का समय है, और परंपरा इसे 1 घं 11 मि के आठ बराबर हिस्सों में बाँटती है। इनमें से तीन ऐसे हैं जिन्हें छोड़ देना चाहिए — कौन से तीन, यह वार पर निर्भर करता है।

दिन का 7 घं 15 मि बाकी

  • 18:34 AM – 9:46 AMलाभसाफ़ — सूर्योदय के बाद का पहला खुला हिस्सा।अनुकूल
  • 29:46 AM – 10:57 AMअमृतयमगंड — शुरुआत और यात्रा के लिए टाला जाता है।चौघड़िया इस समय को अमृत मानता है, जो अनुकूल है। पर यह यमगंड में भी पड़ता है, इसलिए इस पंक्ति में 'टालिए' लिखा है।अभी
  • 310:57 AM – 12:08 PMकालसाफ़ — खुला है, और आज बचा हुआ काम लायक समय यही है।चौघड़िया इस समय को काल मानता है, जिसे वह टालने का समय गिनता है। यह पंक्ति दिन के आठ भागों के हिसाब से है, और इसमें राहु काल, यमगंड या गुलिक में से कोई नहीं पड़ता।अनुकूल
  • 412:08 PM – 1:20 PMशुभगुलिक — जो काम टिकना चाहिए, उसके लिए टाला जाता है।चौघड़िया इस समय को शुभ मानता है, जो अनुकूल है। पर यह गुलिक में भी पड़ता है, इसलिए इस पंक्ति में 'टालिए' लिखा है।टालिए
  • 51:20 PM – 2:31 PMरोगराहु काल — तीनों में सबसे भारी — कोई नया काम शुरू नहीं।टालिए
  • 62:31 PM – 3:42 PMउद्वेगसाफ़ — राहु काल बीत गया, फिर से खुला है।चौघड़िया इस समय को उद्वेग मानता है, जिसे वह टालने का समय गिनता है। यह पंक्ति दिन के आठ भागों के हिसाब से है, और इसमें राहु काल, यमगंड या गुलिक में से कोई नहीं पड़ता।अनुकूल
  • 73:42 PM – 4:54 PMचलसाफ़ — परंपरा में इस हिस्से पर कोई आपत्ति नहीं है।अनुकूल
  • 84:54 PM – 6:05 PMलाभसाफ़ — खुला है, सूर्यास्त तक।अनुकूल

02 · दिन के आठ भाग

चौघड़िया

ये हिस्से यहीं क्यों पड़ते हैं →

दिन को आठ और रात को आठ हिस्सों में बाँटा जाता है, अलग-अलग। दोनों की लंबाई शायद ही कभी बराबर होती है। इसलिए एक ही तारीख़ का दिन-हिस्सा और रात-हिस्सा आम तौर पर अलग होते हैं — यहाँ 1 घं 11 मि और 1 घं 49 मि।

सूर्योदय से सूर्यास्त तक

  • 18:34 AM – 9:46 AMलाभ — लाभ का समय, अनुकूल गिना जाता है।अनुकूल
  • 29:46 AM – 10:57 AMअमृत — अमृत का समय, आठों में सबसे अच्छा।अभी
  • 310:57 AM – 12:08 PMकाल — समय का दबाव माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
  • 412:08 PM – 1:20 PMशुभ — नाम का अर्थ ही शुभ है, और तालिका इसे वैसे ही गिनती है।अनुकूल
  • 51:20 PM – 2:31 PMरोग — रोग का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
  • 62:31 PM – 3:42 PMउद्वेग — बेचैनी का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
  • 73:42 PM – 4:54 PMचल — चलने-फिरने का समय, सामान्य गिना जाता है।सामान्य
  • 84:54 PM – 6:05 PMलाभ — लाभ का समय, अनुकूल गिना जाता है।अनुकूल

सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक

  • 16:05 PM – 7:54 PMउद्वेग — बेचैनी का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
  • 27:54 PM – 9:43 PMशुभ — नाम का अर्थ ही शुभ है, और तालिका इसे वैसे ही गिनती है।अनुकूल
  • 39:43 PM – 11:32 PMअमृत — अमृत का समय, आठों में सबसे अच्छा।अनुकूल
  • 411:32 PM – 1:20 AM, 5 नव॰चल — चलने-फिरने का समय, सामान्य गिना जाता है।सामान्य
  • 51:20 AM – 3:09 AM, 5 नव॰रोग — रोग का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
  • 63:09 AM – 4:58 AM, 5 नव॰काल — समय का दबाव माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
  • 74:58 AM – 6:47 AM, 5 नव॰लाभ — लाभ का समय, अनुकूल गिना जाता है।अनुकूल
  • 86:47 AM – 8:36 AM, 5 नव॰उद्वेग — बेचैनी का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है

03 · उदय और अस्त

सूर्य और चंद्र

सूर्योदय

8:34 AM

सूर्यास्त

6:05 PM

चंद्रोदय

4:34 AM

चंद्रास्त

4:11 PM

दिनमान

9 घं 31 मि

रात्रिमान

14 घं 31 मि

04 · तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार

पंचांग के पाँच अंग

पंचांग यानी पाँच अंग। हर अंग आकाश का एक हिस्सा है जो एक गिने हुए क्षण पर खत्म होता है। पट्टी बताती है कि अभी वाला कितना बीत चुका है।

  • तिथि

    30 में से 26

    कृष्ण पक्ष · एकादशी

    तक 11:06 PM

    • चल रहाएकादशी11:34 PM, 3 नव॰ → 11:06 PM
    • अगलाद्वादशी11:06 PM → 11:01 PM, 5 नव॰

    सूर्य और चंद्र के बीच 12° का अंतर। यही चंद्र दिवस है।

  • नक्षत्र

    27 में से 11 · पद 3

    पूर्व फाल्गुनी

    तक 4:00 PM

    • चल रहापूर्व फाल्गुनी3:56 PM, 3 नव॰ → 4:00 PM
    • अगलाउत्तर फाल्गुनी4:00 PM → 4:25 PM, 5 नव॰

    वह नक्षत्र जिससे चंद्रमा गुज़र रहा है — राशिचक्र का 13°20′ भाग।

  • योग

    27 में से 26

    इंद्र

    तक 6:55 PM

    • चल रहाइंद्र8:30 PM, 3 नव॰ → 6:55 PM
    • अगलावैधृति6:55 PM → 5:38 PM, 5 नव॰

    सूर्य और चंद्र के अंश जोड़कर, उसी प्रकार विभाजित किए गए।

  • करण

    60 में से 51

    बव

    तक 11:17 AM

    • चल रहाबव11:34 PM, 3 नव॰ → 11:17 AM
    • अगलाबालव11:17 AM → 11:06 PM

    तिथि का आधा भाग। प्रत्येक तिथि में दो करण आते हैं।

  • वार

    बुधवार

    बुधवार

    सूर्योदय से सूर्योदय तक

    • चल रहाबुधवार8:34 AM → 8:34 AM, 5 नव॰
    • अगलागुरुवार8:34 AM, 5 नव॰ → 8:34 AM, 6 नव॰

    वार, जो मध्यरात्रि से नहीं बल्कि सूर्योदय से गिना जाता है।

चंद्र

सिंह

तक 10:04 PM · फिर कन्या

चंद्रमा एक राशि लगभग सवा दो दिन में पार करता है। वैदिक ज्योतिष इसी राशि को आपकी मुख्य राशि मानता है।

सूर्य

तुला (Libra)

तक 8:04 AM, 16 नव॰ · फिर वृश्चिक

सूर्य महीने में एक बार राशि बदलता है, जिसे संक्रांति कहते हैं। इसी संक्रांति से चंद्रमास का नाम तय होता है।

05 · हिंदू पंचांग की तारीख

वैदिक तिथि

चंद्रमास

आश्विन

अमांत · अमावस्या से अमावस्या तक

पक्ष

कृष्ण पक्ष

कृष्ण पक्ष

ऋतु

शरद

शरद

अयन

दक्षिणायन

सूर्य दक्षिण की ओर

विक्रम संवत

2083

उत्तर भारतीय गणना

शक संवत

1948

राष्ट्रीय संवत

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

तिथि, नक्षत्र और योग केवल समय पर निर्भर हैं, इसलिए इनके समाप्ति समय पूरे विश्व में समान रहते हैं। सूर्योदय से जुड़ी हर गणना ऐसी नहीं है। वैदिक दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय अक्षांश-देशांतर पर निर्भर करता है। दो शहरों में एक ही घड़ी के समय अलग-अलग तिथि हो सकती है, और उनका राहु काल एक घंटे से अधिक भिन्न होगा। स्थान के बिना पंचांग वास्तव में पंचांग नहीं है।

किसी पंचांग से छापा हुआ नहीं

इस पेज का हर आँकड़ा इसी तारीख और इन्हीं निर्देशांकों के लिए खगोलीय गणना से निकाला गया है, और फिर JPL Horizons से मिलाकर देखा गया है। छपा हुआ पंचांग पूरे इलाके के लिए मिनट तक गोल कर देता है। यह एक बिंदु के लिए सेकंड तक निकलता है। इसलिए कागज़ी पंचांग से थोड़ा फ़र्क होना स्वाभाविक है, और जाँच आप हमारी कर सकते हैं।

यही दिन अपनी कुंडली के हिसाब से देखना है?

आपका जन्म क्षण आज के गोचर को आपके लिए ख़ास बना देता है। मुफ़्त, बिना खाता बनाए, हमारी तरफ़ कुछ भी सहेजे बिना।

कुंडली बनाइए