दैनिक पंचांग · सूर्योदय से सूर्योदय तक
Tabuk का पंचांग
पाँचों अंग, सूर्य-चंद्र, और हर वह समय जो देखकर काम तय किया जाता है — इसी जगह के लिए गणना किए गए, किसी राष्ट्रीय पंचांग से छापे हुए नहीं।
शुक्ल पक्ष, एकादशी · शतभिषा
शक 1948 का आश्विन मास। सूर्योदय 6:39 AM, सूर्यास्त 5:57 PM। तिथि 12:18 PM पर द्वादशी में बदल जाती है।
राहु काल 1:43 PM – 3:08 PM — डेढ़ घंटा, जिसे छोड़ देना बेहतर है
आज रात का चंद्रमा
बढ़ता हुआ, 82% प्रकाशित
आश्विन सुद एकादशी
12:33 PM, 23 अक्टू॰ तक कुंभ राशि में
01 · दिन, घंटे दर घंटे
पूरा दिन, शुरू से आख़िर तक
अभी सूर्य क्षितिज के नीचे है — आज उसका मार्ग, और दिन के कौन से हिस्से देखने हैं
दिन के आठ हिस्से
सूर्योदय से सूर्यास्त तक 11 घं 19 मि का समय है, और परंपरा इसे 1 घं 25 मि के आठ बराबर हिस्सों में बाँटती है। इनमें से तीन ऐसे हैं जिन्हें छोड़ देना चाहिए — कौन से तीन, यह वार पर निर्भर करता है।
- 16:39 AM – 8:03 AMशुभयमगंड — शुरुआत और यात्रा के लिए टाला जाता है।चौघड़िया इस समय को शुभ मानता है, जो अनुकूल है। पर यह यमगंड में भी पड़ता है, इसलिए इस पंक्ति में 'टालिए' लिखा है।टालिए
- 28:03 AM – 9:28 AMरोगसाफ़ — यमगंड बीत गया, फिर से खुला है।चौघड़िया इस समय को रोग मानता है, जिसे वह टालने का समय गिनता है। यह पंक्ति दिन के आठ भागों के हिसाब से है, और इसमें राहु काल, यमगंड या गुलिक में से कोई नहीं पड़ता।अनुकूल
- 39:28 AM – 10:53 AMउद्वेगगुलिक — जो काम टिकना चाहिए, उसके लिए टाला जाता है।टालिए
- 410:53 AM – 12:18 PMचलसाफ़ — इसी में अभिजित मुहूर्त है, 11:55 AM – 12:41 PM, दिन का सबसे अच्छा समय।अनुकूल
- 512:18 PM – 1:43 PMलाभसाफ़ — परंपरा में इस हिस्से पर कोई आपत्ति नहीं है।अनुकूल
- 61:43 PM – 3:08 PMअमृतराहु काल — तीनों में सबसे भारी — कोई नया काम शुरू नहीं।चौघड़िया इस समय को अमृत मानता है, जो अनुकूल है। पर यह राहु काल में भी पड़ता है, इसलिए इस पंक्ति में 'टालिए' लिखा है।टालिए
- 73:08 PM – 4:33 PMकालसाफ़ — राहु काल बीत गया, फिर से खुला है।चौघड़िया इस समय को काल मानता है, जिसे वह टालने का समय गिनता है। यह पंक्ति दिन के आठ भागों के हिसाब से है, और इसमें राहु काल, यमगंड या गुलिक में से कोई नहीं पड़ता।अनुकूल
- 84:33 PM – 5:57 PMशुभसाफ़ — खुला है, सूर्यास्त तक।अनुकूल
02 · दिन के आठ भाग
चौघड़िया
दिन को आठ और रात को आठ हिस्सों में बाँटा जाता है, अलग-अलग। दोनों की लंबाई शायद ही कभी बराबर होती है। इसलिए एक ही तारीख़ का दिन-हिस्सा और रात-हिस्सा आम तौर पर अलग होते हैं — यहाँ 1 घं 25 मि और 1 घं 35 मि।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक
- 16:39 AM – 8:03 AMशुभ — नाम का अर्थ ही शुभ है, और तालिका इसे वैसे ही गिनती है।अनुकूल
- 28:03 AM – 9:28 AMरोग — रोग का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 39:28 AM – 10:53 AMउद्वेग — बेचैनी का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 410:53 AM – 12:18 PMचल — चलने-फिरने का समय, सामान्य गिना जाता है।सामान्य
- 512:18 PM – 1:43 PMलाभ — लाभ का समय, अनुकूल गिना जाता है।अनुकूल
- 61:43 PM – 3:08 PMअमृत — अमृत का समय, आठों में सबसे अच्छा।अनुकूल
- 73:08 PM – 4:33 PMकाल — समय का दबाव माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 84:33 PM – 5:57 PMशुभ — नाम का अर्थ ही शुभ है, और तालिका इसे वैसे ही गिनती है।अनुकूल
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक
- 15:57 PM – 7:33 PMअमृत — अमृत का समय, आठों में सबसे अच्छा।अनुकूल
- 27:33 PM – 9:08 PMचल — चलने-फिरने का समय, सामान्य गिना जाता है।सामान्य
- 39:08 PM – 10:43 PMरोग — रोग का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।अभी
- 410:43 PM – 12:18 AM, 23 अक्टू॰काल — समय का दबाव माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 512:18 AM – 1:54 AM, 23 अक्टू॰लाभ — लाभ का समय, अनुकूल गिना जाता है।अनुकूल
- 61:54 AM – 3:29 AM, 23 अक्टू॰उद्वेग — बेचैनी का समय माना जाता है — परंपरा इसे छोड़ देती है।टाला जाता है
- 73:29 AM – 5:04 AM, 23 अक्टू॰शुभ — नाम का अर्थ ही शुभ है, और तालिका इसे वैसे ही गिनती है।अनुकूल
- 85:04 AM – 6:39 AM, 23 अक्टू॰अमृत — अमृत का समय, आठों में सबसे अच्छा।अनुकूल
03 · उदय और अस्त
सूर्य और चंद्र
सूर्योदय
6:39 AM
सूर्यास्त
5:57 PM
चंद्रोदय
3:37 PM
चंद्रास्त
3:40 AM
दिनमान
11 घं 19 मि
रात्रिमान
12 घं 42 मि
04 · तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार
पंचांग के पाँच अंग
पंचांग यानी पाँच अंग। हर अंग आकाश का एक हिस्सा है जो एक गिने हुए क्षण पर खत्म होता है। पट्टी बताती है कि अभी वाला कितना बीत चुका है।
तिथि
30 में से 11
शुक्ल पक्ष · एकादशी
तक 12:18 PM
- चल रहाएकादशी11:42 AM, 21 अक्टू॰ → 12:18 PM
- अगलाद्वादशी12:18 PM → 12:06 PM, 23 अक्टू॰
सूर्य और चंद्र के बीच 12° का अंतर। यही चंद्र दिवस है।
नक्षत्र
27 में से 24 · पद 3
शतभिषा
तक 6:18 PM
- चल रहाशतभिषा5:17 PM, 21 अक्टू॰ → 6:18 PM
- अगलापूर्व भाद्रपद6:18 PM → 6:32 PM, 23 अक्टू॰
वह नक्षत्र जिससे चंद्रमा गुज़र रहा है — राशिचक्र का 13°20′ भाग।
योग
27 में से 11
वृद्धि
तक 9:08 PM
- चल रहावृद्धि10:02 PM, 21 अक्टू॰ → 9:08 PM
- अगलाध्रुव9:08 PM → 7:37 PM, 23 अक्टू॰
सूर्य और चंद्र के अंश जोड़कर, उसी प्रकार विभाजित किए गए।
करण
60 में से 22
विष्टि
तक 12:18 PM
- चल रहाविष्टि12:06 AM → 12:18 PM
- अगलाबव12:18 PM → 12:18 AM, 23 अक्टू॰
तिथि का आधा भाग। प्रत्येक तिथि में दो करण आते हैं।
वार
गुरुवार
गुरुवार
सूर्योदय से सूर्योदय तक
- चल रहागुरुवार6:39 AM → 6:39 AM, 23 अक्टू॰
- अगलाशुक्रवार6:39 AM, 23 अक्टू॰ → 6:39 AM, 24 अक्टू॰
वार, जो मध्यरात्रि से नहीं बल्कि सूर्योदय से गिना जाता है।
चंद्र
कुंभ
तक 12:33 PM, 23 अक्टू॰ · फिर मीन
चंद्रमा एक राशि लगभग सवा दो दिन में पार करता है। वैदिक ज्योतिष इसी राशि को आपकी मुख्य राशि मानता है।
सूर्य
तुला (Libra)
तक 5:04 PM, 16 नव॰ · फिर वृश्चिक
सूर्य महीने में एक बार राशि बदलता है, जिसे संक्रांति कहते हैं। इसी संक्रांति से चंद्रमास का नाम तय होता है।
05 · हिंदू पंचांग की तारीख
वैदिक तिथि
चंद्रमास
आश्विन
अमांत · अमावस्या से अमावस्या तक
पक्ष
शुक्ल पक्ष
शुक्ल पक्ष
ऋतु
शरद
शरद
अयन
दक्षिणायन
सूर्य दक्षिण की ओर
विक्रम संवत
2083
उत्तर भारतीय गणना
शक संवत
1948
राष्ट्रीय संवत
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
तिथि, नक्षत्र और योग केवल समय पर निर्भर हैं, इसलिए इनके समाप्ति समय पूरे विश्व में समान रहते हैं। सूर्योदय से जुड़ी हर गणना ऐसी नहीं है। वैदिक दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय अक्षांश-देशांतर पर निर्भर करता है। दो शहरों में एक ही घड़ी के समय अलग-अलग तिथि हो सकती है, और उनका राहु काल एक घंटे से अधिक भिन्न होगा। स्थान के बिना पंचांग वास्तव में पंचांग नहीं है।
किसी पंचांग से छापा हुआ नहीं
इस पेज का हर आँकड़ा इसी तारीख और इन्हीं निर्देशांकों के लिए खगोलीय गणना से निकाला गया है, और फिर JPL Horizons से मिलाकर देखा गया है। छपा हुआ पंचांग पूरे इलाके के लिए मिनट तक गोल कर देता है। यह एक बिंदु के लिए सेकंड तक निकलता है। इसलिए कागज़ी पंचांग से थोड़ा फ़र्क होना स्वाभाविक है, और जाँच आप हमारी कर सकते हैं।
यही दिन अपनी कुंडली के हिसाब से देखना है?
आपका जन्म क्षण आज के गोचर को आपके लिए ख़ास बना देता है। मुफ़्त, बिना खाता बनाए, हमारी तरफ़ कुछ भी सहेजे बिना।