मंगल की स्थिति की जाँच
लाइवक्या आपकी कुंडली में मंगल दोष है?
मंगल दोष स्थिति का एक नियम है, कोई फ़ैसला नहीं। हम मंगल को लग्न, चंद्र और शुक्र — तीनों से जाँचते हैं, तीनों दिखाते हैं, और बताते हैं कि यह परिणाम कितना आम है।
अपनी जन्म-जानकारी भरिए
निरयन, लाहिड़ी अयनांश के साथ — वैदिक मानक।
यह कितना आम है?
बहुत सारी कुंडलियों में मंगल उन छह भावों में से किसी एक में पड़ते हैं। तीनों बिंदुओं से गिनें तो हमारी अपनी गणना में यह 40% से ऊपर निकलता है। यह आम बात है, कोई अपवाद नहीं। और कौन से भाव तथा कौन सा बिंदु गिना जाए, इस पर परंपराएँ आपस में सहमत नहीं हैं।
हम उपाय नहीं बेचते
यही तीन शब्द रत्न और पूजा के अधिकांश व्यापार को चलाते हैं। जो कैलकुलेटर आपको डराकर कुछ ख़रीदवाए, वही चीज़ है जिसे हमने न बनाने की बात कही थी। आपको स्थिति मिलती है और उसका संदर्भ। उसका क्या करना है, यह आपका है।
पूरा नियम
कहा जाता है कि मंगल बारह में से छह भावों को पीड़ित करता है। आपकी कुंडली गिनी जाएगी या नहीं, यह पूरी तरह इस पर निर्भर है कि आप वे भाव किस बिंदु से नापते हैं — और तीनों परंपराएँ इस पर एकमत नहीं हैं।
लग्न से
सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला बिंदु। भाव आपके लग्न से गिने जाते हैं।
चंद्रमा से
उत्तर भारत में ज़्यादातर यही चलता है। जन्म का समय पक्का न हो, तब भी इसी से गिना जाता है।
शुक्र से
कुछ परंपराएँ इसे जोड़ती हैं, क्योंकि शुक्र विवाह के कारक हैं। तीनों में सबसे कम माना जाने वाला।
गिने जाने वाले भाव हैं पहला, दूसरा, चौथा, सातवाँ, आठवाँ और बारहवाँ। कुछ परंपराएँ दूसरे भाव को छोड़ देती हैं; कुछ दक्षिणी परंपराएँ पाँचवाँ जोड़ देती हैं। हम ऊपर दिए छह भाव लेते हैं, तीनों संदर्भों से, और हर एक को अलग दिखाते हैं — सबको एक उत्तर में समेटते नहीं।
यह कितना आम है
यह वह हिस्सा है जो उपाय बेचने वाले कभी आपके सामने नहीं रखते। हमने 1950 से 2025 के बीच बेतरतीब बनाई गई 5,000 जन्म-कुंडलियाँ उसी इंजन से निकालीं जो आपकी कुंडली पढ़ता है, और गिना:
49.5%
लग्न से
49.9%
चंद्रमा से
53.2%
शुक्र से
88.6%
इनमें से कम से कम एक से
यह ठीक आधा क्यों निकलता है
49.5% में कोई रहस्य नहीं है। नियम बारह में से छह भाव गिनता है, और मंगल राशि-चक्र में लगभग बराबर फैले रहते हैं। इसलिए वे इनमें से किसी एक में करीब आधी बार पड़ ही जाते हैं। तीनों बिंदु मान लीजिए, तो सवाल यह बन जाता है कि तीन लगभग बराबरी के संयोगों में से कोई भी एक चित आ जाए — इसीलिए यह आँकड़ा बढ़कर लगभग दस में से नौ लोगों तक पहुँच जाता है।
जो गुण लगभग सबमें हो, वह निदान नहीं होता। मान लीजिए आपसे कहा गया है कि आप मांगलिक हैं, और इससे आपका विवाह नहीं हो पाएगा। ऊपर दी गई संख्या वही संदर्भ है जो आपको बताते समय छोड़ दिया गया था।
एक नज़र में
- विधि
- मंगल 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में
- एफ़ेमेरिस
- VSOP87 और ब्राउन की चंद्र-गणना
- अयनांश
- लाहिड़ी, भारत सरकार का मानक
- राशिचक्र
- निरयन
- सटीकता
- नासा JPL Horizons से 10 आर्कसेकंड के भीतर
- पंजीकरण
- कोई नहीं
- हम क्या सहेजते हैं
- कुछ नहीं। आपका परिणाम URL में रहता है
- भाषाएँ
- अंग्रेज़ी और हिंदी
- कीमत
- निःशुल्क
मंगल दोष पर आम सवाल
मंगल दोष क्या है?
इसका मतलब है मंगल का पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में बैठना। परंपरा मंगल को गर्मी, जोश और आगे बढ़ने की ज़िद मानती है, और इन छह भावों को शरीर, घर, जीवनसाथी और साझी चीज़ों का भाव।
मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं मांगलिक हूँ?
इस पेज पर अपनी जन्म जानकारी भरिए। इस जाँच के लिए सही जन्म समय चाहिए, क्योंकि भाव लग्न से नापे जाते हैं और लग्न हर चार मिनट में करीब एक डिग्री खिसक जाता है।
क्या मंगल दोष आम है?
बहुत। 5,000 कुंडलियों पर माप में 88.6% में किसी एक शास्त्रीय संदर्भ से यह बनता है। नियम मंगल को बारह में से छह भावों में रखता है, तो हर संदर्भ किसी के कुछ देखने से पहले ही लगभग आधी कुंडलियाँ पकड़ लेता है।
यह लग्न से देखा जाता है, चंद्र से या शुक्र से?
तीनों चलते हैं, अलग-अलग परंपराओं में, और तीनों एक बात नहीं कहते। 5,000 कुंडलियों पर माप: लग्न से 49.5%, चंद्र से 49.9%, शुक्र से 53.2%। जो पढ़ाई "मांगलिक" कह दे और संदर्भ न बताए, वह बहुत कुछ नहीं बताती।
क्या मंगल दोष कट भी जाता है?
कई शास्त्रीय नियम इसे पूरी तरह काट देते हैं — मंगल अपनी राशि में हो, गुरु के साथ या उसकी दृष्टि में हो, दोनों कुंडलियों में दोष हो, और भी। जो नियम दस में नौ कुंडलियों पर लगता है उसे इतने रास्ते चाहिए ही।
मंगल दोष का उपाय क्या है?
इस साइट पर कुछ भी खरीदने की वजह नहीं है — कोई रत्न नहीं, कोई पूजा नहीं, कोई परामर्श नहीं। अगर कोई पढ़ाई दोष के साथ दाम भी बताए, तो दाम ही वहाँ का असली उत्पाद है। यहाँ के आँकड़े इसीलिए मुफ्त हैं।
अन्य साधन