शास्त्रीय गोचर तालिका आज के बारे में क्या कहती है
मेष से आज 9 में से 2 ग्रह आपके पक्ष में गिने जाते हैं। चंद्रमा उनमें नहीं है, इसलिए आज चंद्रबल नहीं है। यही हिस्सा सबसे तेज़ी से बदलता है। यह सोम 11:15 पर बदलेगा।
3 ग्रह गिने जाते, पर हर एक के जोड़ीदार भाव में कोई दूसरा ग्रह खड़ा है — परंपरा कहती है कि वही फल रोक लेता है।
यह गोचर को आँकता है, आपको नहीं। यह केवल ग्रहों की स्थिति की गिनती है, और यह नहीं बताता कि आपका दिन कैसा जाएगा।
20 सितंबर 2026 से 27 सितंबर 2026
इस अवधि में क्या बदलता है
- चंद्र का मकर में प्रवेशसोम 11:30
- चंद्र का कुंभ में प्रवेशबुध 22:00
- चंद्र का मीन में प्रवेशशनि 06:15
- बुध का तुला में प्रवेशशनि 13:00
ये केवल ग्रहों की चालें हैं, तारीख़ के साथ। इनका आपके लिए क्या अर्थ है, यह आपकी राशि से गिनकर पढ़ा जाता है — वही गिनती ऊपर दी गई है।
राशि स्वामी
♂मंगल · कर्क
1°
सूर्य प्रवेश
☉206 दिन में
अगला वार्षिक गोचर
तिथि
☽Shukla Paksha · Dashami
पूर्णिमा से पहले का चंद्र · चंद्र धनु में
01 · आज एक नज़र में
समग्र स्थिति
मेष से गिनकर, प्रत्येक क्षेत्र को दर्शाने वाले भावों में इस समय कौन-सा ग्रह वास्तव में खड़ा है।
जो चाहिए, वह माँगिए
सूर्य आपके छठे भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: दैनिक कार्य, दिनचर्या, रोग और ऋण। दिखने, अपनी बात रखने, और जिस काम के आसपास आप घूम रहे हैं उसे शुरू करने के लिए ठीक समय।
सूर्य · छठे भाव
ख़र्च पर नज़र रखिए
शनि आपके बारहवें भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: व्यय, विश्राम, त्याग और विदेश-वास। ग़ैर-ज़रूरी ख़र्च पर रुककर सोचना और यह देखना कि क्या-क्या अपने-आप कट रहा है, ठीक रहेगा — इसलिए नहीं कि कुछ आने वाला है, बल्कि इसलिए कि ध्यान देना सस्ता पड़ता है।
यह वित्तीय सलाह नहीं है। न कोई रक़म, न दिशा, न तारीख़।
शनि · बारहवें भाव
कठिन बात नरमी से कहिए
शुक्र आपके सातवें भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: जीवनसाथी, विवाह और हर वह व्यक्ति जिससे आप आमने-सामने व्यवहार करते हैं। इसे दूरी नहीं, टकराव माना जाता है: बात को घुमाने के बजाय सीधे कहिए, और सामने वाले को पूरी बात कहने दीजिए।
शुक्र · सातवें भाव
ऊर्जा साथ है
सूर्य आपके छठे भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: दैनिक कार्य, दिनचर्या, रोग और ऋण। ऐसी दिनचर्या बनाने के लिए ठीक समय जिसे आप निभा सकें — नींद, चलना-फिरना, समय पर भोजन।
यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है। कुछ ठीक न लगे तो डॉक्टर को दिखाइए — यह रुकने का कारण कभी नहीं है।
सूर्य · छठे भाव
घर में शांति रहने दीजिए
गुरु आपके चौथे भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: घर, माता और मन की शांति। इसे दुखी नहीं, अस्थिर माना जाता है। पुरानी बहस दोबारा छेड़ने का दिन नहीं है।
गुरु · चौथे भाव
आज क्या करें
जो चाहिए, वह माँगिए
सूर्य को अधिकार और दिखने का कारक माना जाता है। काम और सेहत के बारे में अपनी बात रखने का अच्छा दिन — जो चाहिए वह माँगिए, और जो किया है वह लोगों को बताइए।
सूर्य · छठे भाव
आज किससे बचें
दो दिन रुक जाइए
चंद्र यहाँ भावनाओं के गरम रहने का संकेत है। यात्रा और सीखना को लेकर आज सब कुछ ज़रूरत से बड़ा लगेगा। अभी कुछ तय करने की ज़रूरत नहीं — चंद्र दो दिन में आगे बढ़ जाता है।
चंद्र · नौवें भाव
योजना में समय जोड़िए
शनि देरी और भार का संकेत देता है। आराम और ख़र्च में आज आपकी योजना से ज़्यादा समय लगेगा। उससे लड़ने के बजाय अतिरिक्त समय जोड़ लीजिए।
शनि · बारहवें भाव
योजना छोटी रखिए
गुरु चीज़ों को बड़ा करता है — ख़र्च समेत। घर और परिवार की योजनाएँ उतनी ही रखिए जितनी आप बिना मदद के सँभाल सकें।
गुरु · चौथे भाव
बहस टाल दीजिए
मंगल यहाँ टकराव पढ़ा जाता है। घर और परिवार को लेकर आज बहस आसानी से शुरू होती है। जो आप जीत भी जाएँगे, वह भी उससे महँगी पड़ेगी।
मंगल · चौथे भाव
आज का मंत्र
मेष के स्वामी मंगल को परंपरा जो बीज मंत्र देती है।
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
oṁ krāṁ krīṁ krauṁ saḥ bhaumāya namaḥ
यह इसलिए दिया गया है कि शास्त्र इसे बताते हैं, किसी उपाय के रूप में नहीं। यह साइट उपाय नहीं बेचती, और यह दावा नहीं करती कि मंत्र से आकाश की स्थिति बदलती है।
02 · गणना
गणना
वैदिक · निरयन
हर ग्रह, मेष से उसका भाव, और शास्त्रीय गोचर तालिका उस पर क्या कहती है। ऊपर के कार्ड इसी गणना से बने हैं।
| ग्रह | आपसे भाव | गोचर में | गोचर |
|---|---|---|---|
| सूर्य | छठे | Kanya 3° | अनुकूल |
| चंद्र | नौवें | Dhanu 21° | प्रतिकूल |
| बुध | छठे | Kanya 21° | अनुकूल |
| शुक्र | सातवें | Tula 11° | प्रतिकूल |
| मंगल | चौथे | Karka 1° | प्रतिकूल |
| गुरु | चौथे | Karka 23° | प्रतिकूल |
| शनि℞ | बारहवें | Meena 18° | प्रतिकूल |
| राहु℞ | ग्यारहवें | Kumbha 4° | वेध मेंआपके पाँचवें भाव में केतु इसे रोक रहा है |
| केतु℞ | पाँचवें | Simha 4° | प्रतिकूल |
कुछ अनुकूल स्थितियाँ क्यों नहीं गिनी जातीं
शास्त्रीय तालिका का दूसरा आधा हिस्सा भी है। जिस भाव को तालिका अच्छा कहती है, वहाँ बैठा ग्रह भी फल नहीं देता अगर जोड़ीदार भाव में कोई दूसरा ग्रह हो — इसे वेध कहते हैं। शनि आपके तीसरे भाव में अनुकूल है, पर तब नहीं जब बारहवें में कोई ग्रह खड़ा हो। यह गणना नौ ग्रहों पर यही जोड़ी लगाती है।
एक और नियम है, विपरीत वेध, जिसमें वेध किसी कठिन स्थिति को काट देता है। ग्रंथ इसे तालिका के रूप में नहीं, सिद्धांत के रूप में कहते हैं। स्रोत किसी एक तालिका पर सहमत नहीं हैं, इसलिए हम इसे यहाँ नहीं गिनते।
यह आकाश है, आपकी कुंडली नहीं
ऊपर लिखी हर बात इस राशि वाले सभी लोगों के लिए सच है। इसे आपका बनाती है वह स्थिति जहाँ ये ग्रह आपके जन्म के समय थे — और उसके लिए आपकी तिथि, समय और स्थान चाहिए।