वृषभ इस सप्ताह
20 सितंबर 2026
- तत्वपृथ्वी
- गुणस्थिर
- स्वामीशुक्र
- अंश30°–60°
शास्त्रीय गोचर तालिका आज के बारे में क्या कहती है
वृषभ से आज 9 में से 1 ग्रह आपके पक्ष में गिने जाते हैं। चंद्रमा उनमें नहीं है, इसलिए आज चंद्रबल नहीं है। यही हिस्सा सबसे तेज़ी से बदलता है। यह सोम 11:15 पर बदलेगा।
2 ग्रह गिने जाते, पर हर एक के जोड़ीदार भाव में कोई दूसरा ग्रह खड़ा है — परंपरा कहती है कि वही फल रोक लेता है।
यह गोचर को आँकता है, आपको नहीं। यह केवल ग्रहों की स्थिति की गिनती है, और यह नहीं बताता कि आपका दिन कैसा जाएगा।
20 सितंबर 2026 से 27 सितंबर 2026
इस अवधि में क्या बदलता है
- चंद्र का मकर में प्रवेशसोम 11:30
- चंद्र का कुंभ में प्रवेशबुध 22:00
- चंद्र का मीन में प्रवेशशनि 06:15
- बुध का तुला में प्रवेशशनि 13:00
ये केवल ग्रहों की चालें हैं, तारीख़ के साथ। इनका आपके लिए क्या अर्थ है, यह आपकी राशि से गिनकर पढ़ा जाता है — वही गिनती ऊपर दी गई है।
राशि स्वामी
♀शुक्र · तुला
11°
सूर्य प्रवेश
☉237 दिन में
अगला वार्षिक गोचर
तिथि
☽Shukla Paksha · Dashami
पूर्णिमा से पहले का चंद्र · चंद्र धनु में
01 · आज एक नज़र में
समग्र स्थिति
वृषभ से गिनकर, प्रत्येक क्षेत्र को दर्शाने वाले भावों में इस समय कौन-सा ग्रह वास्तव में खड़ा है।
बिना चमक वाला काम कीजिए
राहु आपके दसवें भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: कार्य, प्रतिष्ठा और जो संसार देखता है। इसे रुकावट नहीं, गति मानिए — आज महत्वाकांक्षी काम से ज़्यादा दूर स्थिर और साधारण काम जाता है।
राहु · दसवें भाव
ख़र्च पर नज़र रखिए
शनि आपके ग्यारहवें भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: लाभ, मित्र और व्यापक संपर्क। ग़ैर-ज़रूरी ख़र्च पर रुककर सोचना और यह देखना कि क्या-क्या अपने-आप कट रहा है, ठीक रहेगा — इसलिए नहीं कि कुछ आने वाला है, बल्कि इसलिए कि ध्यान देना सस्ता पड़ता है।
यह वित्तीय सलाह नहीं है। न कोई रक़म, न दिशा, न तारीख़।
शनि · ग्यारहवें भाव
कठिन बात नरमी से कहिए
सूर्य आपके पाँचवें भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: संतान, विद्या और जो आप रचते हैं। इसे दूरी नहीं, टकराव माना जाता है: बात को घुमाने के बजाय सीधे कहिए, और सामने वाले को पूरी बात कहने दीजिए।
सूर्य · पाँचवें भाव
दिनचर्या बचाइए
चंद्र आपके आठवें भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: साझा वस्तुएँ, विरासत, और जो आपके वश में नहीं। इसे शरीर के बारे में नहीं, गति के बारे में संकेत मानिए: ठीक से आराम कीजिए, भोजन मत छोड़िए, और थकान में काम मत खींचिए।
यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है। कुछ ठीक न लगे तो डॉक्टर को दिखाइए — यह रुकने का कारण कभी नहीं है।
चंद्र · आठवें भाव
घर में शांति रहने दीजिए
केतु आपके चौथे भाव में है — परंपरा इस भाव को इनसे जोड़ती है: घर, माता और मन की शांति। इसे दुखी नहीं, अस्थिर माना जाता है। पुरानी बहस दोबारा छेड़ने का दिन नहीं है।
केतु · चौथे भाव
आज क्या करें
शुरू कीजिए, योजना मत बनाइए
मंगल को ऊर्जा का कारक माना जाता है। भाई-बहन और छोटी यात्राएँ पर आज लगाया गया परिश्रम सामान्य से आगे जाता है। तैयारी में दिन बिताने के बजाय काम शुरू कीजिए।
मंगल · तीसरे भाव
आज किससे बचें
दो दिन रुक जाइए
चंद्र यहाँ भावनाओं के गरम रहने का संकेत है। साझा पैसा को लेकर आज सब कुछ ज़रूरत से बड़ा लगेगा। अभी कुछ तय करने की ज़रूरत नहीं — चंद्र दो दिन में आगे बढ़ जाता है।
चंद्र · आठवें भाव
योजना में समय जोड़िए
शनि देरी और भार का संकेत देता है। दोस्त और आमदनी में आज आपकी योजना से ज़्यादा समय लगेगा। उससे लड़ने के बजाय अतिरिक्त समय जोड़ लीजिए।
शनि · ग्यारहवें भाव
योजना छोटी रखिए
गुरु चीज़ों को बड़ा करता है — ख़र्च समेत। भाई-बहन और छोटी यात्राएँ की योजनाएँ उतनी ही रखिए जितनी आप बिना मदद के सँभाल सकें।
गुरु · तीसरे भाव
किसी और को सही होने दीजिए
सूर्य यहाँ किसी और के अधिकार से टकराव पढ़ा जाता है। बच्चे और पढ़ाई पर आज ज़ोर लगाएँगे तो विरोध मिलेगा। पीछे हट जाइए, कुछ नहीं जाएगा।
सूर्य · पाँचवें भाव
आज का मंत्र
वृषभ के स्वामी शुक्र को परंपरा जो बीज मंत्र देती है।
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
oṁ drāṁ drīṁ drauṁ saḥ śukrāya namaḥ
यह इसलिए दिया गया है कि शास्त्र इसे बताते हैं, किसी उपाय के रूप में नहीं। यह साइट उपाय नहीं बेचती, और यह दावा नहीं करती कि मंत्र से आकाश की स्थिति बदलती है।
02 · गणना
गणना
वैदिक · निरयन
हर ग्रह, वृषभ से उसका भाव, और शास्त्रीय गोचर तालिका उस पर क्या कहती है। ऊपर के कार्ड इसी गणना से बने हैं।
| ग्रह | आपसे भाव | गोचर में | गोचर |
|---|---|---|---|
| सूर्य | पाँचवें | Kanya 3° | प्रतिकूल |
| चंद्र | आठवें | Dhanu 21° | प्रतिकूल |
| बुध | पाँचवें | Kanya 21° | प्रतिकूल |
| शुक्र | छठे | Tula 11° | प्रतिकूल |
| मंगल | तीसरे | Karka 1° | अनुकूल |
| गुरु | तीसरे | Karka 23° | प्रतिकूल |
| शनि℞ | ग्यारहवें | Meena 18° | वेध मेंआपके पाँचवें भाव में बुध इसे रोक रहा है |
| राहु℞ | दसवें | Kumbha 4° | प्रतिकूल |
| केतु℞ | चौथे | Simha 4° | प्रतिकूल |
कुछ अनुकूल स्थितियाँ क्यों नहीं गिनी जातीं
शास्त्रीय तालिका का दूसरा आधा हिस्सा भी है। जिस भाव को तालिका अच्छा कहती है, वहाँ बैठा ग्रह भी फल नहीं देता अगर जोड़ीदार भाव में कोई दूसरा ग्रह हो — इसे वेध कहते हैं। शनि आपके तीसरे भाव में अनुकूल है, पर तब नहीं जब बारहवें में कोई ग्रह खड़ा हो। यह गणना नौ ग्रहों पर यही जोड़ी लगाती है।
एक और नियम है, विपरीत वेध, जिसमें वेध किसी कठिन स्थिति को काट देता है। ग्रंथ इसे तालिका के रूप में नहीं, सिद्धांत के रूप में कहते हैं। स्रोत किसी एक तालिका पर सहमत नहीं हैं, इसलिए हम इसे यहाँ नहीं गिनते।
यह आकाश है, आपकी कुंडली नहीं
ऊपर लिखी हर बात इस राशि वाले सभी लोगों के लिए सच है। इसे आपका बनाती है वह स्थिति जहाँ ये ग्रह आपके जन्म के समय थे — और उसके लिए आपकी तिथि, समय और स्थान चाहिए।